August 18, 2022

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कोरोना काल में सात समंदर पार से पहुंचाई मदद, अब ऑनलाइन जॉब दिलाने की मुहिम छेड़ी

अपनों की चिंता में रातें जागकर काटीं, कराया हॉस्पिटल में बेड, प्लाज्मा और ब्लड का इंतजाम

ग्वालियर.

अपना घर, अपना गांव, अपना शहर सभी को प्यारा होता है और जब कभी भी वहां मुसीबत आती है। वे लोग मदद के लिए आगे आते हैं, जिनका बचपन वहां गुजरा होता है। वे भले ही सात समंदर रह रहे हों, लेकिन उनका दिल आज भी उन्हीं गलियों में धड़कता है। इन्हीं में से एक हैं बैंकॉक की एंटरप्रेन्योर श्वेता गुप्ता, जिन्होंने कोरोना काल में ग्वालियर में मदद पहुंचाई। रात-रात भर अपनों को हॉस्पिटल में बेड, खून और प्लाज्मा के इंतजाम में जागकर काटी। उन्होंने कंसनट्रेटर पहुंचाए, साथ ही आर्थिक मदद भी पहुंचाई और आज जब सब ठीक है, तो वे युवाओं की ऑनलाइन जॉब के लिए प्रयासरत हैं, जिनकी कोरोना काल में नौकरी छूटी है।

पापा और फ्रेंड्स से पहंचाई आर्थिक मदद
श्वेता ने बताया कि मेरी ससुराल और मायका दोनों ग्वालियर में है। मेरे दोनों परिवार में सभी कोरोना पॉजिटिव हुए और समय के साथ ठीक हुए। उस समय मैंने कंसनट्रेटर पहुंचाए। हालांकि जब तक परिवार के सभी लोग ठीक हो चुके थे और वह किसी और के काम आए। उस समय कई परिवारों को आर्थिक मदद की भी जरूरत थी, वो मैंने पिता और फ्रेंड के माध्यम से पूरी की।

शादी के पहले चलाती थी सेवन सिस्टर ग्रुप
श्वेता ने बताया कि मैं जब ग्वालियर में थी, तब सेवन सिस्टर ग्रुप बनाया था। इसमें हम 7 फ्रेंड्स थे। उस समय चैरिटी शो करके कारगिल और उड़ीसा मदद पहुंचाई थी। आज हम सभी फ्रेंड्स अलग-अलग जगह पर हैं, लेकिन इस संक्रमण काल में सभी ने ग्वालियर के लिए बहुत कुछ किया।

पहले भी कर चुकी हैं मदद
उन्होंने बताया कि कोरोना की पहली लहर में लोग देशभर से अपने-अपने घर पैदल ही चल पड़े थे। तब मैंने पापा (शालीग्राम गोयल) के एकाउंट में पैसे भेजे और उन्होंने मेरे भेजे गए पैसे से कहीं अधिक लोगों की हर संभव मदद की। तब से आज तक मैं कई वॉट्सऐप और फेसबुक ग्रुप से जुड़ी हैं, जिससे मुझे ग्वालियर की अपडेट मिलती रहती है।