July 2, 2022

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आठ माह के आर्यन को ग्वालियर के डॉ. अजय उपाध्याय ने दिया नया जीवन, लंग का विकृत हिस्सा ऑपरेशन कर निकाला

सांस लेने में हो रही थी दिक्कत, जीभ और नाखून पड़ गए थे नीले

30 परसेंट ही बच्चे को मिल रही थी ऑक्सीजन, एक लाख बच्चों में एक को होती है ये परेशानी

डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप है। वह चाह ले तो मरीज को यमराज के हाथों से भी छुड़ाकर ला सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है शहर के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अजय उपाध्याय ने। उन्होंने आठ माह के आर्यन को नया जीवन दिया। आर्यन को पिछले चार माह से सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसका वजन भी नहीं बढ़ रहा था। जीभ व हाथ के नाखून नीले पड़ गए थे। उसे 30 परसेंट ही ऑक्सीजन मिल पा रही थी। दरअसल आर्यन के फेफड़े का कुछ भाग जन्म विकृत था। यानि वह ‘कंजेनिटल लोबार एम्फिएमाÓ बीमारी से ग्रसित था, जो एक लाख में से किसी एक बच्चे को होती है। ऑपरेशन कर वह हिस्सा निकाल दिया गया। इस दौरान एक फेफड़े को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया, जो बहुत ही जोखिम भरा था। अब आर्यन बिल्कुल ठीक है।

उरई में चल रहा था निमोनिया का इलाज
उप्र के उरई में रहने वाले अनिल गोयल ने बताया कि मेरे बेटे की सांस जन्म से फूलती थी। हमने उरई में दिखाया तो निमोनिया का इलाज चला, लेकिन स्थितियां सामान्य नहीं हुईं। उसकी जीभ और नाखून भी नीले पड़ गए। इस पर मैंने ग्वालियर में दिखाया। ऑपरेशन के बाद अब बच्चा बिल्कुल ठीक है। उसे नया जीवन मिला है। मां अनीता गोयल ने बताया कि बीमारी सुनकर मैं बहुत डर गई थी। किसी तरह हिम्मत रखी और आज बेटा ठीक है।

बच्चा एक मिनट में 80 बार ले रहा था सांस
डॉक्टर उपाध्याय ने बताया कि आर्यन की हालत बहुत खराब थी। बच्चा एक मिनट में 80 बार सांस ले रहा था। उसके फेफड़े का एक हिस्सा जन्म से ही विकृत था। बच्चा एक तरफ के फेफड़े से सांस लेता रहा और हमने थोरोकटोमी ऑपरेशन से उस भाग को निकाल दिया। यानि तीन घंटे बच्चा एक तरफ के लंग से सांस लेता रहा। 3 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बच्चा बिल्कुल ठीक है।

लंग की कैपिसिटी हो गई थी कम
आर्यन के दाएं फेफड़े के बीच का कुछ हिस्सा खराब था, जिसे ऑपरेशन से निकाला गया। इस फेफड़े में सांस अंदर तो जा रही थी, लेकिन बाहर नहीं निकल रही थी। इस कारण से एक हिस्सा फूलकर दूसरे हिस्से को दबा रहा था। टोटल लंग की कैपिसिटी कम हो गई। समय के साथ यह प्रॉब्लम बढ़ती जा रही थी, जिससे बच्चे की जान जाने का भी खतरा था।