August 18, 2022

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मुश्किलों से हार नहीं मानी, कठिन परिश्रम कर बने सीए

ग्वालियर.
सीए डे आज: चुनौतियों ने सिखाया खुद पर भरोसा करना

समय के साथ चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) की भूमिका अहम हुई है। कंपनियों से लेकर नौकरीपेशा व्यक्ति तक की मदद सीए कर रहे हैं। इनकम टैक्स भरना हो, ऑडिट करवाना हो या कोई भी फाइनेंशियल मदद हो, लोग सबसे पहले सीए के पास जाते हैं। लेकिन यह बात भी सही है कि यहां तक पहुंचने की डगर बहुत कठिन है। इस कठिन डगर में वही चल पाते हैं, जिनके हौसले बुलंद होते हैं और लक्ष्य पर उनकी निगाह होती है। सीए डे के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसे ही सीए से परिचित करा रहे हैं, जिन्होंने मुश्किलों से हार नहीं मानी और सीए बनकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने।

संघर्ष भरा रहा जीवन, लेकिन रुका नहीं चलता ही गया
एक डिसीजन आपकी लाइफ बदल सकता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मैं मैथमैटिक्स का स्टूडेंट था। बीएससी का फॉर्म डालने जा रहा था। मेरे भाई के मित्र आए और बीकॉम में स्कोप बताया। मैंने बीकॉम के लिए अप्लाई किया। वही समय मेरी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट रहा। सीए बनने के बाद भिंड में प्रैक्टिस करने लगा। सोचा ग्वालियर में ही ऑफिस होना चाहिए। तब मैंने 10 बाय 10 का ऑफिस लिया। बस से ग्वालियर आता और स्टेशन पर रखी बाइक से ऑफिस पहुंचता। ऐसा कई साल करने के बाद 2011 में ग्वालियर में शेटल्ड हुआ और प्रैक्टिस शुरू की। बीच में कई अड़चने आईं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। आज मेरे पास खुद की प्रॉपर्टीज हैं। इस समय शहर की बड़ी फंडिंग वाली सभी इंडस्ट्रीज हैंडल कर रहा हूं।
दीपेन्द्र सोनी, सीए

मेरी काबलियत मे लिए नितिन गडकरी से मिला सम्मान
मुझे सीए बनाने का सपना परिवार का था, जो मैंने 2010 में पूरा किया। मुंबई, चंडीगढ़ में कुछ समय नौकरी की। इसके बाद मेरे पास वहीं जॉब के अवसर थे, लेकिन मेरी ग्वालियर चम्बल संभाग के उद्योग जगत की सेवा की चाह वापस अपने शहर ले आई और मैंने सीए फर्म डाल दी। मैं अपने पिता (राम कुमार) से प्रेरित था। वे चोपड़ा कनसल्टेंट्स के नाम से 1983 में बानमोर, मालनपुर एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में सलाहकार के रूप अहम भूमिका निभा रहे थे। मुझे दो साल पहले दिल्ली में आयोजित एमएसएमई कार्यक्रम में तत्कालीन कैबिनेट मिनिस्टर नितिन गडकरी के हाथों पुरस्कृत होने का मौका मिला।
प्रभात चोपड़ा, सीए